Tuesday, 13 August 2013

umga means

उमगा याने , उमगने वाली जिस में उमंगे भरी हो
हुलसना, उमगना जैसे देशी शब्दों को हम प्रयुक्त नही करते है
हमारे बचपन के वक्त जो शब्द हम सुनते थे , अपने बड़ों से
वो अब नही सुन सकते , क्योंकि वो लुप्त हो चुके है
जिसका प्रयोग नही होता, वो शब्द ख़त्म हो जाते है
ओ भाषा भी नस्त हो जाती है
कितनी ही भाषा व् बोली आज हम नही जान  सकते 

ye umga

हे उमगा
लगती है ,तू
निश्ताब्ध निशा में
खुमार जगा जगा
 
              २
मधुर मधुर हंसी तुम्हारी
अरुण अरुण , तुम्हारे कपोल
नैनों में तेरे , विहंसते फूल
प्रिय लगते , तुम्हारे मीठे बोल
आगमन से तुम्हारे , नदियों में कल्लोल
(कल्लोल -कल कल )
ह्रदय में उठी है , ये कैसी हिलोर
सजनी तो सीधी है
पर नैन उसके बरजोर
जोगेश्वरी 

Saturday, 10 August 2013

baharo ful barsao

अब क्या लिखूं
बहारों फुल बरसो 

ye ek kavita shesh thi

ये मतवाली
तुम कितनी सम्रद्ध हो
तुम्हारे उभार में
कंचन-जंघा का  चरम है
तुम्हारे सौन्दर्य से
प्रकृति का ऐश्वर्य
छलक पड़ता है
तुम्हारी उद्दात भावनाएँ
जैसे उफनता हुवा
समुद्र है
तुम जैसे
शिवालिक की  चोटियों को
आंदोलित करती हुयी
विजय करती हुयी
मुस्कराती हो
वो, तुम्हारी तिरछी
चितवन की
बंकिम हँसी , व्
लजीली मुस्कान निरख कर
लगता है
गूंजने लगी हो,
बांसुरी कान्हा की

जोगेश्वरी 

amrpga

आम्र -पगा ,
क्या स्थगित कर दूँ , ये कविता
ये श्रंखला
किसी दुसरे-जनम में पूरी करने के लिए

मैंने  जो अनुराग -पगा लिखी हूँ
वो, दरअसल आम्र-पगा ही है

Tuesday, 6 August 2013

ye sumukhi

हे सुमुखी रूप तेरा
चांदनी से धुला  धुला
शरद की पूर्णिमा में
जैसे चंद्रमा उजला
उर्वशी रूप तुम्हारा
जंवा -कुसुम सा जगा जगा
जिसने भी देख लिया
रह गया ठगा ठगा
अषाढ़ की  रातों में
जुगनुओं की आंख -मिचौली
इसे में मधुर लगती
म्रदु-भाषणी तुम्हारी बोली
बादलों संग बिजली का
सावन में चल रहा विहार
सुन्दरी तेरे आंचल में सजे
प्रणय के प्रेमोपहार
अनुराग-पगा तेरी चितवन
करती भावों का संचार
लाज से ढके मूंदे
युअवन के प्रेमोपहार
जोगेश्वरी 

ye vdhu, ye bhamini

 वधु , ये भामिनी
तुम्हारी मुस्कराहट की चकाचौंध
मुझे अनुरागी बनती है
तुम्हारी रूप-ज्योत्स्ना में
तप्त ह्रदय को शीतलता मिलती है
तुम समस्त सुखों को
प्रदान करनेवाली, गौरी हो
तुम्हारे जैसा सुख देने वाला
इश जीवन में नही   है
तुम मेरी समस्त कलाओं की
उत्तराधिकारी हो
तुम मेरे पुत्र की सहज सखी हो
उसे प्रेरित करने वाली बनो
तुम्हारे सिवा मुझे कोई उसका
सच्चा हितेषी नही मिलता
तुम सच्ची भवप्रीता हो
तुम जैसी सहनशील कौन है ?
तुम्हारा स्नेह अचल है
तुम्हारे आँचल में प्रसून खिले
तुम हमारे घर आँगन में
खुशियों की वृष्टि करती हो
तुम्हारे आने से हमारे कुल की
श्री वृद्धि होती है
मै  तुम्हे अपने सरे कर्तव्य सौंप कर
विश्रांति पाती  हु
तुम जन्हा भी रहो , विजयी रहो
तुम सुरक्षित रहो, सुखी बनो
जन्हा भी रहो, लक्ष्मी तुम्हारी
अनुगामिनी बने
जोगेश्वरी