Friday, 23 August 2013

aj prath se

आज प्रात से
जब हवाएं घूम रही है
 दिशाओं में अकुलाई सी
 में नींद में लगती हो
विहंसती कुनमुनाई सी
ओ , हंसनी
तुम्हारे मुग्ध करने वाले
नैन बाण ,निरखकर
मोहित  हुए है
मेरे प्राण


Wednesday, 21 August 2013

kantar....

कान्तार
तेरे रमणीय अहसासों से
सज गया है
मेरा ह्रदय प्रान्तार
देख ,कैसा मेघ
नित बरसता है
आकाश ,धुशर होकर भी
नित , नूतन लगता है
जाने ह्रदय के किस कोने में
 करती हो ,तुम विश्राम
कि ठिठक के
बज  उठे है
मन वीणा  के प्राण

जोगेश्वरी 

Saturday, 17 August 2013

tere aspas

तेरे आसपास
मेरे दिल के अहसास
क्या  यंही है
प्रेमपाश 

Thursday, 15 August 2013

kavita likhne ke liye

kavita likhne jaruri nhi ki, aap bndhi bndhayi lik pr chale
यदि, मै कोई तुकबन्दी करूं , तो उसे कविता नही कह सकते
कविता  पहले आप कोई माहौल को याद कीजिये
फिर उसे कागज के हवाले कीजिये
वैसे कविता तो ह्रदय से स्वत ही निकलती है
आप जब अपनी कविता खुद ही लिखेगे , तो आपको बेहद ख़ुशी होगी
जैसे , रात हो,
सावन की जिन्गुरों से गुंजित रात हो
आसमान में चंद्रमा चमक रहा हो
रात इसी महसूस हो रही हो
जैसे की, वो खामोश सी कोई कविता है
आपका दिल क्या महसूस करता है
ये लिखिए , कोई उपमा या उपमान
या कोई बिम्ब सूझे, तो रात को वो नाम दीजिये
जैसे रात को आप एक इसी रहस्यमयी सुन्दरी कह सकते है
जिसने चांदनी के सितारों वाली ओढनी ओढ़ी हो , और अपने प्रियतम
चंद्रमा से मिलने चली हो
आप सावन के महीने में लिख रहे है , तो उसकी विशेषता लिखे
कैसे जुगनुओं को चमकते देख रहे है, जो अपनी चमक से अँधेरे को भीमात  दे रहे हो
(नही लिख सकती, बहुत शोर हो रहा है )

Wednesday, 14 August 2013

k ye bhi bat h

एक शे'र है , सुनिए

तुम रेल सी  गुजरती हो
वो , पुल सा थरथराता है
(ये बावली , कुछ तो रहम कर )

fir vnhi bat h

अपनी आखों में लगा लिया है
तुमने रात  का अंजन
चाँद सी जगमगा उठी है
काया तेरी कंचन कंचन
तल्लीन है , रात उनींदी सी
कोई नया  ख्वाब बुनने में
उंघती चांदनी मस्त है
उंघते बादलों को। ……. में
(यंहा। ……. में आप जो शब्द रखना चाहो )

Tuesday, 13 August 2013

ye kavita bhi sadharan h

तेरे आंचल में खिले
फूल ही फूल
तेरे ओठों पर सजे
हंसी मृदुल मृदुल
तेरी चितवन करें बातें
चटुल , चटुल
चित्त मेरा ,तुझे पाकर
होता है , प्रफुल्ल

एक औसत कविता