Saturday, 19 October 2013

kuchh tere rup ka tikhapan

कुछ कुछ 
कुछ तेरे रूप का तीखा-पन 
कुछ तेरे मिजाज की गर्माहट 
तेवर तेरे तेज तेज 
लगते है , चंद्रमुखी 
जब भी दिखती हो 
नाराज सी लगती हो 
न पहली सी बोली 
न वो हंसी ठिठोली 
लगता है , तुझे गुस्से में देख 
कि , मेरे कलेजे में लग गयी है  गोली 
(गोली , means  बन्दुक की 
वो फालतू नही सोचे )

pahle to email glt likhi

 आज तो कविता नही लिखूंगी 
सर में बहुत दर्द है 
और बुखार भी है 

thik nhi swasthay

आज बिलकुल ठीक नही लग रहा
नही पता क्यों नाराज रहती है 
थक गयी 
पहले तो ब्लॉग ही नही मिला 
जब मिला, तो कोई कविता 
लिखने का मन नही 

pahle to pc nhi chala

मूड ऑफ़ हो गया 
पहले तो pc  नही चला 
क्या खाक कविता करती 

Thursday, 17 October 2013

thanks

जो, आज तुमने उपहार दिया 
ये जो प्यार दिया  सोनू के जीवन में 
नई उमंग बनके समा जाओ 
तुम्हारे आने से 
बहारें  आई है 
रीतों ने ली 
अंगड़ाई है 
सोनू, रीते ह्रदय से 
देखा करता ह चंद्रमा 
जल्दी में क्या लिखू 
उसके सुने जीवन की तुम ही हो 
चंद्रज्योत्सना  

Saturday, 12 October 2013

dil kyon dhadkta h

kisi ne likha tha
puchha tha
ki, 
ye dil kyon dhadkta h
ye dil kyon dhadkta h
dil kyon dhadkta h
iska jwab mile
to, samajhna
sabkuchh jan liya

Friday, 4 October 2013

jb bhi socho, to

jb bhi socho, to
ynhi sochna
ki hr vqt nye git likhu
nye git gungunau
kabhi knhi
thak ke 
ruk na jaun