Tuesday, 16 July 2013

madhuyamini

करवटें बदलती ,धड़कती  रातों की
सितारों से सुसज्जित नभ में
उतराती खचित परातों  की
अंगडाई लेती ,चन्द्र-ज्योत्स्ना से
असमान की मनुहारी बातों की
मधु-सिंचित मुस्कराते फूलों की
सुवासित इठलाती बारातों की
लहकती महकती बौराती आती
गंगा की उफनती मौजों की
शहनाई सी गूंजती तन्हाई में
निशा के लहकते झंझावातों की
मदभरी मुस्कानों में छिपी
अनंग की अनकही बातों की
लिखी नही जाती कोई कविता
मधुयामिनी ली लजाती   मुलाकातों की

(यंहा, मौजों को पहले चक्रवात लिखी थी, किन्तु, आजकल मौसम के मिजाज को देखकर उसे मौजों में बदल दी ) जोगेश्वरी सधीर 

Monday, 15 July 2013

vo

vo, आचार्य चतुरसेन शास्त्री क्या कहता है 

badh aa gyi h

गुरु-पूर्णिमा के पहले इस बरस , बरस बरस से , हाल हुए बेहाल
अब तो रहम करो महाकाल 

likhne ke liye, jindagi chhoti h

कुछ कवितायेँ, जो कल लिखी

साँझ जब तुम दीप जलावोगी
फिर कुछ याद कर मुस्करावोगी
सच उसी लम्हा , जाने क्यों
तुम, औरत से फूल  बन जाओगी

खुद को सजाते -संवारते हुए
जब तुम कुछ गुनगुनावोगी
रजनीगन्धा की तरह तुम भी
तब रातों को मह्कओगी

एक कलश जल
जो,तुमने गंगा की लहरों से
उलीचा था
सच कहो,
क्या ,उसी क्षण
तुमने कुछ यादों को
नही सींचा था

 जोगेश्वरी सधीर 

Sunday, 14 July 2013

ek turant likhi kavita

हाँ , यहाँ , कैफ़े की भीड़ व् शोर में लिख रही हूँ
ये कविता, तुरत -फुरत तैयार डिश की तरह
जो, शायद तुम्हारी favorit हो जाये

की, आज भी याद आती
जब भी , तू, अपने घर में
दिए जलाती है
तू, आज भी , बेतरह से
याद आ जाती है
तब मेरी आँखों में
जाने कैसी धुंध सी
छा जाती है
बहुत प्रिय है, मुझको
तेरी मुस्कान की तरह
तेरी दिये जलाने वाली
जीवनशैली
दुआ करती हूँ
तेरी वो उजली मुस्कराहट
वक़्त की धुंध में
न हो, जाये मैली 

Tuesday, 9 July 2013

anuvad ke liye likh rahi hu

अनुवाद, जो नही देख सकी

बेइरादा नजर मिल गयी तो
वो, मुझसे दिल, मेरा मांग बैठे
कैसे संभलेगा उनसे मेरा दिल
जाने वो, ये क्या मांग बैठे
अब , देखे अनुवाद 

Monday, 8 July 2013

solah ane sachchi

अनुवाद के लिए है

पूरी सोलह आनी सच्ची
ये प्रेम कहानी
इसमें दूध ही दूध है
नही जरा भी है ,पानी
चंचल , गोरिये .....