nav vadhu
Thursday, 7 November 2013
सोनू के साथ वंहा जाना चाहती हूँ
जंहा बहुत साडी पारियां हो
जंहा सोनू का दिल लगे
वो, उस तनाव से मुक्त हो जो उसे विरासत में मिला है
Wednesday, 6 November 2013
मंकी मंकी
मंकी
माआअंकी
मानकी बोझिलता कम नही हो रही है
उदाश हो जाती हूँ
Tuesday, 5 November 2013
आपने आप को बर्दास्त करना सबसे ज्यादा कठिन होता है
तुम्हारे जेन के बाद कुछ भी नही रहा यद्
तुम्हारे जाने के बाद
कुछ भी नही रहा याद
कोई किस्से करे फरियाद
आपकी खुसी में हमारी ख़ुशी
जो मन में बसे , वो उर्वशी
Saturday, 2 November 2013
कल
छत पर सांझ में टहल रही थी
बारिश कि यद् आयी
उड़ते हुए पखेरू देखकर सोचती हु बहुत भावुक हो जाती हु
ये कहता है , बारिश का महीना
तेरे बिन मुस्किल हुवा जीना
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