Tuesday, 24 January 2017

aaj आज मोती तालाब के पास एक गौ माँ को बहुत दुर्बल बैठे देखि 
वो उठ नही सकती थी 
पास में गोबर पड़ा था 
मई घर गयी और 
ढेर सारा भात ले आयी 
मंगोड़े भी , और पानी भी 
वो गौ वन्ही थी 
मख्खियां भीं भिनभिना रही थी 
सब अपनी रौ में बहे जा रहे थे 
मैंने जब उस गौ को भात व् मंगोड़े दिए , तो 
उसने खा लिए 
पानी पिया 
और उठने की कोशिश करने लगी 
पर उसके पालक उसे देखने नही आये 
उसे उसके हाल पर छोड़ गए 
मुझे बहुत सुकून व् दिमाग में शांति-शीतलता महसूस हुई 
जाने वो उठेगी या नही 
बुआ जी के घर कई गौएँ अंतिम वक्त में 
ऐसे ही बैठी रह जाती थी 
और टिल टिल मरती हुई 
मृत्यु की बात जोहती थी 
काश. हमारे जिंदगी के भागते पलों में 
कुछ लम्हे हम किसी भी दुखी जिव की मदद क्र पाए 
तो, दिल को चैन मिले 

Tuesday, 1 March 2016

रूप रंग सलोना
फिर भी हो अबोला
कंही तो, एक नज़र पा  जाये
उसके जलवों से रूबरू हो जाये
दिखे रातदिन
इन्ही स्वप्न सलोना 

Monday, 29 February 2016

जब किसी के प्रति ये हो कि 
उसे देखे बिना आप को ठीक न लगे 
हमेशा लगे कि 
उससे बात करनी है पर वो आपसे बात न करे 
इन्ही नही उसकी सूरत देखे बिन 
दिन की शुरुआत न हो 
फिरभी चेहरा सामने नही हो तब, आप उसे सिर्फ तब्बसुम में 
पाएंगे , लेकिन कब तक 

Sunday, 28 February 2016

 आज अचानक ३ रीडिंग हुई है, नववधू की
ये किसी नववधू पर नही है
पर हाँ किसी नई नवेली पर लिखा है इसमें
किन्तु आजकल, सूझता ही नही कि क्या लिखूं
कभी किसी को बहलाने लिखा जैसे
सच तो ये है कि
मन कभी किसी का पुराना  नहीं होता
पर मन एकरसता से ऊब जाता है
जब  एक ही बात किसी पर लड़ते है तब बी मेरा मतलब लादते है तो
और मन इतना बेईमान है कि इसे सम्भालना अच्चन अच्छों के बश में नही है हम हमेशा
परेशान होते है, मन कंही लगता नही
और अपने मनके दोगलेपन को किस्से कहे
मन हमेशा हमारी तरफदारी नही करता
इसीलिए इसे समझने , व् सँभालने हम क्या क्या करते रहते है
सच मन को बस  भी एक समस्या है
नववधू हर कोई हर लड़की है सभी का मन नया नवेला होना और रहना चाहता है पर
हमारे मन की परवाह करे, ऐसा कोई एक बहुत मुस्किल
और तक़दीर से मिलता है 

Saturday, 21 November 2015

आश्चर्य ये है, की नववधू की रीडिंग १७ नवंबर को हुई है आजकल 
मैंने नही लिखा है, इसे ,किन्तु,जो पुराण है, वो बहुत पाया लिखा है