Monday, 27 April 2015

प्रीती
प्रीती होती है , निभाने के लिए 
अफ़साने होते है , सुनाने के लिए 
गीत होते है।,गुनगुनाने के लिए 
और, रूठी हुई, प्रेयशी होती है 
प्यार से मनाने के लिए। ........

Saturday, 14 February 2015


बुआजी के घर की यादें  आज भी आती है 
वो, बिदाई गीत गाती थी 
हमारी जाती के बिदाई गीत , कलार समाज के सबके अपने 
बिदाई गीत, जिनका अर्थ एक ही होता था 
हम पर्देशिन , परदेशिन 
हम परदेशिन माई , पाहुनिन ओ 
हम चली , माई हम चली , हम चली परदेश 
छोटे से मुँह की माई , घायलि 
मोरी, माई पनिया भरण को जाए 
कहां जुड़बो, साथ 
मायके में जुड़ाबो साथ,
(मुझे वो, गीत याद नही , बीएस २ -४ प्नतियां भर याद रही 
काश वो, गीत संजोती, बहुत प्यारे गीत थे जणवा-कुसुम में लिखे भी है 
कुछ गीत, मैंने 
इसमें ,
हम पर्देशिन, माई पहोनिन ओ ,
ये बहुत भावभीना गीत होता था )

Monday, 20 October 2014

तुमसे
तुमसे जीवन में श्रृंगार है 
भर बहार ही बहार है 
तुम खुद जीवन का श्रृंगार हो 
तुम्ही अभिसार हो 
तुम उसकी दवा हो 
जो जीवन से पराजित व् बीमार हो