Sunday, 9 June 2013

आस है, तो, प्याश है

जब तू, आस-पास है
तो , लगता है, कुछ खास है
लगता है , चारों ओर
छाया , मधुमास है 
तुम्हारी हंसी को, हरसिंगार कहते है
आँखों में जो बसा , उसे रतनार कहते है
जीवन में जो, आके न जाये कभी
इसी बहार को, प्यार कहते है
         
                            जोगेश्वरी 
ye सुधारकर लिख रही हूँ

कभी मुस्कराके देख
कभी चिलमन हटाके , देख
मरने वाला भी, जिन्दा हो जाये
चाहे तो अजमा के देख
जोगेश्वरी
सोनू को नींद आ रही है 
नही पता क्यूँ आँखों में इतने आँसू  क्यूँ आते है 

Friday, 7 June 2013

बन्नो तेरा कजरा, लाख सोहे 
बन्नो तेरी अंखिया, सुरमेदानी 

Sunday, 2 June 2013

कभी चिलमन हटा के देख
कभी मुस्करा के देख
मरने वाला भी जिन्दा हो जाये
जो, तुम इतरा  के देखो 

Friday, 31 May 2013

कविता        - ये किसकी यादों ने अंगडाई ली
 ये किसकी यादों ने
ली, दिलों में अंगडाई , कि
तुम्हारी आँखों से
झलक पड़ा  है , यौवन

गुनगुना उठी है, धूप
महकने लगे है , वन-उपवन

ये किसकी परछाई
कसमसाई , नैनों की झील में
ये किसके अधरों ने किया है
आलिंगन का अनुवाद

जोगेश्वरी सधीर